🙏🏻प्रणाम आदरणीय सर जी, आपकी आवाज़ सुरीली और लेखनी सदैव भावपूर्ण, लयबद्ध ही रहती हैं इसका सबसे बड़ा राज क्या है, साथ ही आपको सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ इसका श्रेय भवँर दादा को विपुल दादा को जाता है उन्हें भी दिल से प्रणाम और धन्यवाद हमें यह सौभाग्यपूर्ण सुअवसर प्राप्त करवाने हेतु।🌹🙏🏻🙏🏻
🙏🏻प्रणाम आदरणीय सर जी, आपकी आवाज़ सुरीली और लेखनी सदैव भावपूर्ण, लयबद्ध ही रहती हैं इसका सबसे बड़ा राज क्या है, साथ ही आपको सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ इसका श्रेय भवँर दादा को विपुल दादा को जाता है उन्हें भी दिल से प्रणाम और धन्यवाद हमें यह सौभाग्यपूर्ण सुअवसर प्राप्त करवाने हेतु।🌹🙏🏻🙏🏻
आ.सर, गीतकार के लिए अवसरों पर थोड़ा प्रकाश डालें।
ReplyDelete🙏🏻प्रणाम आदरणीय सर जी,
ReplyDeleteआपकी आवाज़ सुरीली और लेखनी सदैव भावपूर्ण, लयबद्ध ही रहती हैं इसका सबसे बड़ा राज क्या है, साथ ही आपको सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ इसका श्रेय भवँर दादा को विपुल दादा को जाता है उन्हें भी दिल से प्रणाम और धन्यवाद हमें यह सौभाग्यपूर्ण सुअवसर प्राप्त करवाने हेतु।🌹🙏🏻🙏🏻
🙏🏻प्रणाम आदरणीय सर जी,
ReplyDeleteआपकी आवाज़ सुरीली और लेखनी सदैव भावपूर्ण, लयबद्ध ही रहती हैं इसका सबसे बड़ा राज क्या है, साथ ही आपको सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ इसका श्रेय भवँर दादा को विपुल दादा को जाता है उन्हें भी दिल से प्रणाम और धन्यवाद हमें यह सौभाग्यपूर्ण सुअवसर प्राप्त करवाने हेतु।🌹🙏🏻🙏🏻